जीएसटी परिषद

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने के लिए संविधान में संशोधन हेतु संविधान संशोधन विधेयक (122वां संशोधन), 2014 संसद में प्रस्तुत किया गया था। यह विधेयक मई 2015 में लोकसभा द्वारा पारित किया गया। कुछ संशोधनों के साथ यह विधेयक अंततः 3 अगस्त 2016 को राज्यसभा में और उसके बाद 8 अगस्त 2016 को लोकसभा में पारित हुआ। 15 से अधिक राज्यों द्वारा पारित होने के बाद, इसे 8 सितंबर 2016 को माननीय राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई और  इसे 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 के रूप में अधिनियमित किया गया, जो संसद और राज्य विधानमंडलों को वस्तु एवं सेवा कर से संबंधित कानून बनाने की समवर्ती शक्ति प्रदान करता है और वस्तु एवं सेवा कर परिषद के गठन का प्रावधान करता है।

संविधान के अनुच्छेद 279ए(1) के अनुसार, संविधान (एक सौ एक वा) संशोधन अधिनियम, 2016 के लागू होने के 60 दिनों के भीतर राष्ट्रपति द्वारा जीएसटी परिषद का गठन किया जाना था। अनुच्छेद 279ए को 12 सितंबर, 2016 से प्रभावी करने की अधिसूचना 10 सितंबर, 2016 को जारी की गई थी।

संविधान के अनुच्छेद 279ए(2) के अनुसार, जीएसटी परिषद में निम्नलिखित सदस्य होंगे: -

  1. क) केंद्रीय वित्त मंत्री
  2. ख) राजस्व या वित्त प्रभारी केंद्रीय राज्य मंत्री
  3. ग) प्रत्येक राज्य सरकार द्वारा नामित वित्त या कराधान के प्रभारी मंत्री कोई अन्य मंत्री
  4. घ) भारत के संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत आपातकाल की घोषणा वाले राज्य के राज्यपाल द्वारा मनोनीत कोई भी व्यक्ति।

अनुच्छेद 279ए(4) के अनुसार, जीएसटी परिषद जीएसटी से संबंधित मुद्दों, जैसे कि जीएसटी के अधीन या उससे छूट प्राप्त वस्तुएं और सेवाएं, मॉडल जीएसटी कानून, लेवी के सिद्धांत, आपूर्ति के स्थान को नियंत्रित करने वाले सिद्धांत, सीमा सीमाएं, जीएसटी दरें जिनमें बैंड सहित न्यूनतम दरें शामिल हैं, प्राकृतिक आपदाओं/विपदाओं के दौरान अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए विशेष दरें, कुछ राज्यों के लिए विशेष प्रावधान आदि पर केंद्र और राज्यों को सिफारिशें करेगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 सितंबर, 2016 को जीएसटी परिषद की स्थापना और साथ ही इसके सचिवालय के कार्यालय की नई दिल्ली में स्थापना किये जाने की मंजूरी दे दी। इसके साथ ही निम्नलिखित प्रावधान भी किए गए:

(क) राजस्व सचिव को जीएसटी परिषद के पदेन सचिव के रूप में नियुक्त करना;

(ख) जीएसटी परिषद की सभी कार्यवाही में केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क बोर्ड (अब केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड) के अध्यक्ष को स्थायी आमंत्रित (गैर-मतदान) सदस्य के रूप में शामिल करना;

(ग) जीएसटी परिषद सचिवालय में जीएसटी परिषद के अतिरिक्त सचिव का एक पद और आयुक्त के चार पद सृजित किए जाएंगे। जीएसटी परिषद सचिवालय में कार्य करने वाले केंद्र और राज्य सरकारों दोनों से प्रतिनियुक्ति पर लिए गए जायेंगे।

16 सितंबर, 2016 को भारत  सरकार ने अधिसूचना जारी कर संवैधानिक संशोधन अधिनियम की सभी धाराओं को लागू किया और जीएसटी को कार्यान्वित करने की प्रक्रिया प्राम्भ की। इस अधिसूचना में  जीएसटी को लागू करने के लिए एक वर्ष की समय सीमा, यानी 15 सितंबर, 2017 तक का समय निर्धारित किया गया था।

जीएसटी परिषद में कामकाज के संचालन के नियम;  देखें

जीएसटी परिषद की पहली बैठक 22 और 23 सितंबर, 2016 को हुई थी ,  और तब  से, परिषद जीएसटी से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श और निर्णय लेने के लिए समय-समय पर इसकी बैठक होती रहती है।

सामान्यतः, जीएसटी परिषद अपनी बैठकों में सर्वसम्मति के आधार पर निर्णय लेती है। हालांकि, यदि किसी प्रस्ताव पर मतदान होता है, तो केंद्र सरकार के मत का भार उस बैठक में डाले गए कुल मतों का एक तिहाई होगा, सभी राज्य सरकारों के मतों का संयुक्त भार उस बैठक में डाले गए कुल मतों का दो तिहाई होगा, और प्रस्ताव तभी पारित होगा जब उपस्थित और इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने वाले सदस्यों का कुल भारित मत सभी मतों के तीन चौथाई के बराबर या उससे अधिक हों।

जीएसटी परिषद की अब तक 55 बैठकें हो चुकी हैं और इसके निर्णयों का भारत में जीएसटी के कार्यान्वयन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है।  जीएसटी परिषद द्वारा लिए गए कुछ महत्वपूर्ण निर्णय इस प्रकार हैं:

  • व्यवसायिकों को अपनी स्व-रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करने के लिए ई-वे बिल व्यवस्था को 24 वीं जीएसटी परिषद की बैठक में मंजूरी दी गई। इसके अलावा, ई-चालान को ई-वे बिल प्रणाली और जीएसटी रिटर्न के साथ एकीकृत किया गया, जिससे ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिला।
  • रियल स्टेट सेक्टर के लिए शुरू की गई विशेष योजना के तहत, परिषद ने अपनी 33 वीं और 34 वीं  बैठकों में निर्माणाधीन संपत्तियों पर लागू गैर-किफायती आवास योजना पर प्रभावी दर को 12% से घटाकर 5% और किफायती आवास योजना पर लागू दर को 8% से घटाकर 1% करने को मंजूरी दी।
  • जीएसटी परिषद ने अपनी 35 वीं बैठक में जीएसटी के अंतर्गत ई-इनवॉइसिंग प्रणाली को लागू करने की मंजूरी दी है। यह प्रणाली भारत में जीएसटी व्यवस्था के तहत मानकीकृत प्रारूप में इनवॉइस तैयार करने और रिपोर्ट करने का एक डिजिटल तंत्र है। ई-इनवॉइसिंग की सीमा को और कम कर दिया गया है और 1 अगस्त, 2023 से ₹5 करोड़ या उससे अधिक के वार्षिक कारोबार वाली कंपनियों के लिए व्यावसायिक आपूर्ति के लिए ई-इनवॉइस जारी करना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • हरित ऊर्जा पहलों को बढ़ावा देने के लिए, जीएसटी परिषद ने अपनी 36 वीं बैठक में सभी इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी की दर को 12% से घटाकर 5% करने और 12 से अधिक लोगों की बैठने की क्षमता वाली इलेक्ट्रिक बसों को जीएसटी से छूट देने को मंजूरी दी।
  • जीएसटी परिषद ने अपनी 42 वीं बैठक में लघु व्यवसाय के लिए क्यूआरएमपी योजना को मंजूरी दी।
  • कोविड-19 महामारी के दौरान राहत उपाय के रूप में, परिषद ने अपनी 43 वीं और 44 वीं  बैठक में कोविड से संबंधित निर्दिष्ट वस्तुओं पर शुल्क के युक्तिकरण को मंजूरी दी।
  • जीएसटी रिटर्न को सरल बनाना और स्वतः भरना, जिससे करदाताओं के लिए अनुपालन आसान हो जाता है।
  • डिजिटल भुगतान को सुगम बनाने के लिए इनवॉइस पर डायनामिक क्यूआर कोड की शुरुआत।
  • दरों का युक्तिकरण: 28% जीएसटी स्लैब के अंतर्गत आने वाली 227 वस्तुओं को घटाकर 35 वस्तुएं कर दिया गया है।
  • जीएसटी परिषद ने अपनी 47 वीं  बैठक में सीजीएसटी नियमों में कुछ संशोधन जैसे कि इनवर्टेड ड्यूटी के मामलों में धनवापसी की गणना के सूत्र में परिवर्तन, जीएसटीआर-4 दाखिल करने में देरी के लिए विलंब शुल्क की और छूट, कर भुगतान के अतिरिक्त तरीके आदि के माध्यम से कुछ व्यापार सुविधा उपायों को मंजूरी दी,।
  • परिषद ने अपनी 49 वीं बैठक में वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (जीएसटीएटी) के गठन की सिफारिश की, जिसकी प्रधान पीठ नई दिल्ली में और राज्य सरकारों के अनुरोध के आधार पर परिषद द्वारा अनुशंसित स्थानों पर राज्य स्तरीय पीठें होंगी।
  • करदाताओं की सुविधा के उद्देश्य से, परिषद ने अपनी 52 वीं बैठक में उन मामलों में मांग आदेशों के खिलाफ अपील दाखिल करने के लिए माफी योजना की सिफारिश की, जहां अपील निर्दिष्ट समय अवधि के भीतर दाखिल नहीं की जा सकी।

  जीएसटी व्यवस्था ने एक निर्बाध राष्ट्रीय बाजार की नींव रखी है, जिससे भारत की कर प्रणाली में बदलाव आया है और आर्थिक विकास को गति मिली है। इस प्रक्रिया में जीएसटी परिषद ने नीतियों की नियमित समीक्षा और संशोधन करके चुनौतियों का सामना करने में लचीलापन दिखाया है। इस गतिशील दृष्टिकोण ने आवश्यक सुधारों को संभव बनाया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि कर प्रणाली व्यवसायों और अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकसित हुई है और इसने भारत में सहकारी संघवाद के विचार को मजबूत किया है।